जब हम किसी का भला करना चाहते हैं तब अगर कोई हमसे पूछिए कि आप हमारे लिए इतना क्यों कर रहे हो आपका इसमें क्या लाभ है तो एक समय के लिए तो बहुत गुस्सा आता है कि मैं इनकी मदद कर रहा हूं और यह मुझ पर ही शक करी जा रही है और गुस्से में हम उनकी मदद करने से मना भी कर देते हैं और हमें अपने आप को कोसने लगते हैं कि हम ऐसे क्यों हैं और लोग हमें क्यों नहीं समझ पाते असल में समस्या हमारी नहीं है समस्या ऐसी दुनिया के हर उस लोगों की सोच की है जो कि इतना
बुरा कह चुकी है कि अब अच्छा होते हुए भी उसे कुछ बुरा होने की संभावना रहती है यह कहे तो डर भय के समान उनके मन में बस जाता है और उसकी सोचने समझने की क्षमता समाप्त हो जाती है ऐसी समस्या के ऊपर है पाना किसी के लिए भी आसान नहीं होता।।
बुरा कह चुकी है कि अब अच्छा होते हुए भी उसे कुछ बुरा होने की संभावना रहती है यह कहे तो डर भय के समान उनके मन में बस जाता है और उसकी सोचने समझने की क्षमता समाप्त हो जाती है ऐसी समस्या के ऊपर है पाना किसी के लिए भी आसान नहीं होता।।

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