बचपन में हमें कुछ अनुभव नहीं होता और हमारी अधिक से अधिक जगिया सब जानने की होती है जिसके कारण हम अपने मित्रों या अनचाहे लोगों के संपर्क बढ़ाने की कोशिश करते हैं जिससे हमें अधिक जानकारी मिल सके और हमें समय
रहे कर अधिक ज्ञान प्राप्त कर सकें ओरो को अपनी ओर आकर्षित कर सके परंतु जल्दबाजी के चक्कर में हम समस्याओं में फंस जाते हैं झूठ बोले ना शुरू कर दे देते हैं और सत्य को छुपाते रहते हैं परंतु हम नहीं जानते एक सच को छुपाने के लिए हमें कितने झूठ बोलने पड़ते जाएंगे परंतु सच्चाई जानने के बाद भी हमारे अपने हमें समझाते हैं क्या क्या सही है क्या गलत है परंतु हम स्वतंत्रता अपना अनुभव प्राप्त करने के अंधकार में डूब चुके होते हैं जिसके आगे हमें अपने और पराए में अंतर समझ नहीं आता और जब समझ में आता है तो काफी देर हो जाती है ऐसी समस्याओं से निकलने के लिए घरवालों पर विश्वास होना जरूरी है और घरवालों को चाहिए कि उनका बच्चा बाहर ना जाए वह जिसको जानना चाहता है वो घर वाले ही होते हैं बताए इससे वह बुरी संगत से बच जाएगा और अपने और पराए में अंतर करना सीख जाएगा।।
रहे कर अधिक ज्ञान प्राप्त कर सकें ओरो को अपनी ओर आकर्षित कर सके परंतु जल्दबाजी के चक्कर में हम समस्याओं में फंस जाते हैं झूठ बोले ना शुरू कर दे देते हैं और सत्य को छुपाते रहते हैं परंतु हम नहीं जानते एक सच को छुपाने के लिए हमें कितने झूठ बोलने पड़ते जाएंगे परंतु सच्चाई जानने के बाद भी हमारे अपने हमें समझाते हैं क्या क्या सही है क्या गलत है परंतु हम स्वतंत्रता अपना अनुभव प्राप्त करने के अंधकार में डूब चुके होते हैं जिसके आगे हमें अपने और पराए में अंतर समझ नहीं आता और जब समझ में आता है तो काफी देर हो जाती है ऐसी समस्याओं से निकलने के लिए घरवालों पर विश्वास होना जरूरी है और घरवालों को चाहिए कि उनका बच्चा बाहर ना जाए वह जिसको जानना चाहता है वो घर वाले ही होते हैं बताए इससे वह बुरी संगत से बच जाएगा और अपने और पराए में अंतर करना सीख जाएगा।।

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